प्रेरक गीत- डॉ० गीता नौटियाल जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहन डाॅ० गीता नौटियाल जी द्वारा रचित प्रेरक गीत-:
🙏📝प्रेरक गीत
आवा मेरि बैण्यों इतिहास रचौला,
लोगू का मन की तै रंज मिटौला ।।
नौनी नौनू से कम नि छिन,
या हमारी ललकार।
हमतैं पूरि शिक्षा अर पूरू चैंदु प्यार।।
आवा मेरी बैण्यों इतिहास रचौला....
बेटि तैं शिक्षा मिलली रुकलू अत्याचार,
ज्ञान की धारा बगली मिटलु अन्धकार।
आज हम पढ़ि लिखि क ह्वे जौला त्यार,
तबि हमारा समाज कु बदललु व्यवहार।।
आवा मेरी बैण्यों इतिहास रचौला...
बिकास की दौड़ मा च हमारु योगदान,
बेटि शक्ति मन्ख्यूँ की बेटि च बरदान।
समाज कि गाड़ी तैं हम लगौला पार,
हमतैं जरूरी च शिक्षा कू आधार।।
आवा मेरी बैण्यों इतिहास रचौला....
इंदिरा, किरण, प्रतिभा दीदि न कब करि इंतजार,
हम भी अगनै बड़दी जौला कभि नि माणला हार।
बेटा बेटि छिन समान इन बणदा बिचार,
बेटी का जन्म पर बि त मनौला त्योहार।।
आवा मेरी बैण्यों इतिहास रचौला...
🙏रचना-:
डाॅ० गीता नौटियाल (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० बैनोली
वि० ख० जखोली, रुद्रप्रयाग
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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