स्वाधीनता- श्रीमती बसन्ती शाह

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आजादी के अमृत महोत्सव के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहन श्रीमती बसन्ती शाह जी द्वारा रचित कविता-:


*स्वाधीनता*

आजादी का महापर्व यह,

स्वाधीनता की कहानी है।

भारत माता के तिरंगे के नीचे,

अमर शहीदों की कहानी है।।


मेरठ से क्रान्ति शुरू हुई,

दिल्ली में इतिहास रचाया।

इण्डिया गेट, लाल किला,

राज घाट अमर किया।।



सूती कपड़ा चरखे से बुनना,

स्वदेशी अपनाओ का नारा दिया।

तिरंगे को फहराने के लिए,

न जाने क्या-क्या सहना पड़ा।।


जेल में कहकर फांँसी पर लटके,

रात दिन भूखे और प्यासे भटके।

स्वाधीनता पाने के लिए,

अपनी जान पर खेल गये।।



हमारी आन-बान और शान है,

विश्व में भारत की पहचान है।

सदा लहरायेगा सबके दिलों में,

तिरंगा ही हमारा मान है।।


🙏रचना:-

बसन्ती शाह( प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० कुमड़ी

वि० ख०-जखोली, रुद्रप्रयाग


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

होली - श्रीमती सुशीला थपलियाल

माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी