देवाधिदेव महादेव - श्रीमती सरोज डिमरी जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में पवित्र सावन मास में देवाधिदेव महादेव की आराधना के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-:
देवाधिदेव महादेव
जय आशुतोष शिव शंकर अवढरदानी,
जय गिरी तनया जय माँ भवानी।
सती पार्वती के प्राण ईश्वर,
आशुतोष आनन्द उजागर।।
सावन का पुण्य मास पुनीता,
शिव पूजा का है उल्लास अनूपा।
आओ मिलकर सावन मनायें,
हर सोम को शिव आराधना के गीत गायें।।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश तुम्ही हो,
सबके भाव और भक्ति तुम्ही हो।
गणपति, कार्तिकेय, गौरा संग,
विराजमान सम्पूर्ण शिव परिवार हो।।
चराचर जगत के तुम अधिनायक,
भोले शंकर करुणानिधि जग सुखदायक।
आदि, अनादि देव शुभ सागर,
आशुतोष भोले शिव शंकर।।
नीलकंठ विष पीकर होवे,
नित्य लिपटे गल कालकूट भयंकर।
भांँग धतूरा जो दर्द देते,
इन सबके तुम शुभ शमनकर।।
जन कल्याण हेतु करें विषपाना,
नीलकण्ठ नाम जग कल्याणा।
नानाविध जीव करें प्रणामा,
मिलती नित-नित नई प्रेरणा।।
सांसारिकता कटुता को चुपचाप,
शिव के जैसै यूँ पी जाना।
सुख, समृद्धि, शान्ति के दाता,
देवाधिदेव शंकर भगवाना।।
महादेव हैं आदि देवता,
सुर, नर, मुनि सब करें प्रणाम।
जिस जिसने भी शिव को पूजा,
नहीं भाया उसे अन्य कोई दूजा।।
शिव-शिव, शंकर दुख हर सुख कर,
सब का बेड़ा पार करो।
महामंत्र मृत्युंजय शिव-शिव,
मन से सदा जाप करो।।
तेरे सुमिरन से सबका जीवन,
हुआ पावन अति पुलकित।
सावन शिव-ध्वनि सुनकर,
अन्तर्मन हुआ अतिशय पुलकित।।
🙏रचना-:
सरोज डिमरी(स०अ०)
रा० आ० उ०प्रा० वि० गौचर
वि० ख०- कर्णप्रयाग, चमोली
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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