उत्तराखण्ड प्यारू- श्रीमती सूरी भारती जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सूरी भारती जी द्वारा रचित गढ़वाली गीत-:


*उत्तराखण्ड प्यारु*


उतराखण्ड राज्य प्यारू, मैं सेवा लगाैलू,

बानि-बानि का फूल मैं सेवा मा चढ़ौलू।


थड़िया, चम्फुली, हारूल, पौणा, सरों,

तान्दी लगाैलू , मैं तान्दी लगौलू। 

चोफला, पंडो नाचि-नाचि पैजुली बजौलू,

उत्तराखण्ड राज्य प्यारु मैं सेवा लगौलू।

 बानि-बानि का फूल मैं सेवा मां चढ़ौलू।।


अल्गोजा, मंजीरा बजैक मैं,

फूलदेई मनौलू, मैं फूलदेई मनौलू।

हुड़की बजै, झुमैला प्यारु गीत लगौलू,

उत्तराखण्ड  राज्य प्यारू मैं सेवा लगौलू। 

बानि-बानि का फूल मैं सेवा मां चढ़ौलू।।



घुघती, हरेला, घी संक्रान्ति कू, 

मैं त्यौहार मनौलू,  त्यौहार मनौलू।

भैल्यों की बगवाली खेली पकोड़ा बणौलू,

उत्तराखण्ड राज्य, प्यारु मैं सेवा लगौलू।

बानि-बानि का फूल सेवा मा चढ़ौलू।।


लिंक पर क्लिक करें व वीडियो देखें। 

 

ऋतु बसन्त एन यख मैं, 

गीत लगौलू, मैं गीत लगौलू।

भारत का शीश भलु मुकुट सजौलू,

उत्तराखण्ड राज्य, प्यारु मैं सेवा लगौलू।

बानि-बानि का फूल सेवा मा चढ़ौलू।।

 


🙏रचना-:

सूरी भारती (प्र०अ०)

 रा० प्रा० वि० उठड़

वि० ख०- जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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