गुरु महिमा-श्रीमती रेखा पुरोहित

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला *हिम मन मन्थन* में शिक्षक दिवस पावन पर्व प्रस्तुत है *आज जनपद- रुद्रप्रयाग* से शिक्षिका बहन श्रीमती *रेखा पुरोहित* जी द्वारा रचित कविता-:


*🙏🕉️🙏📝गुरु महिमा*


गुरु की महिमा हम क्या गायें,

है यह बहुत ही महान।

गुरु ही है वह ज्योतिपुंँज जो,

करता जीवन प्रकाशमान।। 


गुरु शब्द की महिमा तो, 

होती विस्तृत सम आकाश।

गु का अर्थ अन्धकार तो,

रु का अर्थ होता प्रकाश।। 


अनजाना सा होता रिश्ता,

गुरु और शिष्य का मगर। 

उंँगली पकड़कर वह ले जाता,

शिष्य को ज्ञान की राह पर।।



उचित अनुचित का भेद बताता,

सत्य असत्य का ज्ञान कराता। 

जीवन की मुश्किल राहों पर,

चलना वो उसको सिखाता।।


गुरु बिना यह जीवन ऐसा,

बाग बिना माली का जैसा। 

गुरु ही शिष्य को संँवारता,

जीवन को उसके निखारता।।


रचना:-

रेखा पुरोहित (स०अ०)

रा० प्रा० वि० सौंराखाल 

जखोली,रुद्रप्रयाग



*🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड*

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