हिन्दी भाषा- श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला *हिम मन मन्थन*  में *हिन्दी दिवस* पर प्रस्तुत है आज *जनपद-रुद्रप्रयाग* से शिक्षिका बहन श्रीमती  *देवेश्वरी सेमवाल* जी द्वारा रचित *कविता*-:


🙏📝हिन्दी भाषा


बच्चों का प्रथम शब्द है हिन्दी, 

माँ की लोरी में है हिन्दी। 

पिता के प्यार, दुलार में हिन्दी, 

सम्पूर्ण ममता की छाँव है हिन्दी।। 


वर्णों का गुणगान है हिन्दी, 

वर्णमाला की शान है हिन्दी। 

शब्दों का खजाना है हिन्दी, 

वाक्यों का संसार है हिन्दी।। 



शब्दकोश की जान है हिन्दी, 

लेखन का अभिमान है हिन्दी। 

भाषाओं में सबसे आगे, 

सबसे प्यारी भाषा हिन्दी।। 


जन-जन की भाषा है हिन्दी, 

हमारी सच्ची आशा है हिन्दी। 

जिसने है भावनाओं को जोड़ा, 

वह मजबूत धागा है हिन्दी।। 


हिन्दी मान है हिन्द का, 

हिन्दी ही अभिमान। 

हिन्दी से ही होती है, 

भारत की सच्ची पहचान।। 


हिन्दी मेरी जान  है, 

हिन्दी ही मेरी शान। 

हिन्दी में ही बसा मेरा, 

ये प्यारा सा हिन्दुस्तान।। 


अपने वतन का मान है हिन्दी, 

शहीदों का अभिमान है हिन्दी। 

एकता की परम मिसाल है हिन्दी, 

देश को जोड़े हुए रखती हिन्दी।। 


आओ मिल हिन्दी दिवस मनायें, 

अपनी भाषा का परचम लहरायें।

जन-जन तक यह संदेश पहुँचायें, 

हिन्दी भाषा को हम सशक्त बनायें।। 


🙏रचना-:

देवेश्वरी सेमवाल (स०अ०) 

रा० उ० प्रा० वि० कान्दी

ब्लॉक- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग




*🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड*

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