हिन्दी - - सरोज डिमरी जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हिन्दी दिवस पर प्रस्तुत है आज जनपद-चमोली  से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता -:

*हिन्दी*


 हिन्दी भाषा सरल सुरुचिकर

 उगता हो प्रातः जैसे दिनकर।

 माॅं, मातृभूमि और मातृभाषा,

 होती है स्वर्ग से बढ़कर।।


अपनी चिर-परिचित सी होकर, 

आयी हो जैंसे सज सँवरकर।

रही विरासत सदियों से जो,

चमक रही है बनकर भाष्कर।।


संस्कृति-सभ्यता का ये समन्दर।

गले लगाती बाँह फैलाकर।

जन-जन की बोली का आधार,

हमारी हिन्दी हमारी पहरेदार।।


बातचीत का माध्यम हिन्दी है,

माथे की बिन्दी हिन्दी है।

गले का हार, शीश का ताज,

तन-मन-धन सब हिन्दी है।।

 


मैं और मेरी हिन्दी ,

ये मेरी पहचान है।

विविधता में भी एकता,

भारत देश महान है।।


🙏रचना:–

सरोज डिमरी (स०अ०)

रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर

वि० ख०-  कर्णप्रयाग

चमोली, उत्तराखण्ड 




🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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