देवात्मा हिमालय- श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हिमालय दिवस पर प्रस्तुत है आज जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी द्वारा रचित कविता-:
देवात्मा हिमालय
भारत का है मुकुट हिमालय,
हिमाच्छादित सदा हिमालय।
पर्वत राज बना हिमालय,
शान से देखो खड़ा हिमालय।।
देवात्मा की उपाधि हिमालय,
दैवीय शक्तियों का वास हिमालय।
सौन्दर्यता की मिसाल हिमालय,
जन-जन का श्रृंगार हिमालय।।
साहित्य सृजन की आत्मा हिमालय,
ऋषि-मुनियों की गाथा हिमालय।
संस्कृत साहित्य की छटा हिमालय,
सुख-समृद्धि, सभ्यता की मिसाल हिमालय।।
अटल, अविचल खड़ा हिमालय,
प्रकृति की प्राकृतिक सम्पदा हिमालय।
कण-कण में सुशोभित हिमालय,
भारत की आन, मान, शान हिमालय।।
आओ मिल हिमालय दिवस मनायें,
जन-जन तक यह संदेश पहुँचायें।।
🙏रचना-:
देवेश्वरी सेमवाल (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० कान्दी
ब्लॉक- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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