दीपावली- श्रीमती सूरी भारती

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में दीपोत्सव पावन पर्व प्रस्तुत है आज जनपद- टिहरी गढ़वाल  से शिक्षिका बहन श्रीमती  सूरी भारती जी द्वारा रचित कविता-:


🙏🕉️🔯🪔📝दीपावली



अयोध्या में श्री राम आये,

दीपावली पूरा भारत वर्ष मनाये। 

आयी-आयी प्यारी दीपावली,

झिलमिल-झिलमिल मतवाली।।


बचपन के दिन याद आते,

बाजारों में सजी हैं फुलझड़ियाँ

खुशियों से भरी वो दीपावली,

रंग-बिरंगी फूलों की लड़ियाँ।।



रंग-बिरंगे खिलौने बताशे,

हम सबको थे खूब भाते।

मीठी-लाल इमरती मन से खाते,

मुर्गा छाप पटाखे चुन-चुन लाते।।


सुबह अधजले पटाखे खोजते सारे,

बचपन में लगते थे ये सब प्यारे।

फुलझड़ियों के झिलमिल सितारे,

आकाश बत्ती, चकरी जगमग न्यारे।।



दीपों से करते थे घर उजियारे, 

जो लगते थे बचपन में अति प्यारे।

ओ खील बताशों से भरी थालियाँ,

उनके साथ भरी चाय की प्यालियाँ।।



आयी-आयी प्यारी दीपावली,

जगमग-जगमग-जगमग करती।

झिलमिल-झिलमिल-झिलमिल करती,

मतवाली-मतवाली प्यारी दीपावली।। 

 

रचना -

 सूरी भारती (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० उठड़

वि० ख०-जाखणीधार, टि०ग०

 उत्तराखण्ड।


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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