गोवर्द्धन पूजा व भैया दूज-श्रीमती सरोज डिमरी जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में गोवर्द्धन एवं भैया दूज पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल  से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-:


🙏🕉️🔯🪔📝 गोवर्द्धन पूजा व भैया दूज


प्रेम स्नेह सहयोग दया का,

जब हर मन से दीप जले।

दीपावली को तब उसका,

सही-सही अर्थ मिले।।


गंगा जी पूजे, यमुना पूजे,

यमुना पूजे यमराज को। 

परस्पर पूजते भाई-बहन को,

ज्यों सुभद्रा पूजे श्रीकृष्ण को।।


बहिन पूजें अपने भाइयों को,

मिलकर मनाएँ भैया दूज।

त्यौहार ये इन दोनों का,

निश्छल प्रेम से परिपूर्ण।। 



 गंगा-यमुना में जब तक,

निर्मल अविरल नीर बहे।

निर्भय भाई-बहन में वैसे ही,

निर्मल, निश्छल प्रेम रहे।।


रिश्तों की मर्यादा बनी रहे,

मेरे भाई की आयु बढ़े। 

शुभकामना दिल करता रहे,

जब तक तन में प्राण रहे।।



गोवर्द्धन पूजा से हम सब,

यह कामना करते हैं।

सभी के 'गौ' इन्द्रियों में,

विवेक का सुशासन रहे।।



तन-मन-धन से समृद्धि रहे,

विचारों की समानता बने।।


🙏रचना-:

सरोज डिमरी (स०अ०) 

रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर

कर्णप्रयाग, चमोली



🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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