वीर बाल दिवस-श्री मनोज घिल्ड़ियाल

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में वीर बाल दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज  जनपद- पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी द्वारा रचित  कविता-:



वीर बाल दिवस


सुनो-सुनो इक कथा सुनो,

जिसमें असीम व्यथा सुनो।

चक्रव्यूह में फॅंस ज्यों मारे गए,

उन अभिमन्यों की कथा सुनो।।


पोते थे उन गुरु तेग बहादुर के,

धर्मार्थ जिन्होंने शीशदान किया।

पूत थे उन गुरु गोविन्द सिंह के,

सर्वस्व जिन्होंने होम कर दिया।।


सहोदर वे उन सिंहों के थे,

चमकौर में जो शहीद हुए थे।

वे भला कब चुप रहने वाले थे,

वे भी इसी परम्परा के पाले थे।।



बहुत ललचाया डराया विधर्मी ने, 

किन्तु अडिग निडर बनाया धर्मबल ने।

आखिर धर्म बचाना स्वीकार किया,

भले ही स्वयं को दीवार में चुनवा दिया।।



तब मात्र छः साल के जोरावर सिंह थे,

और नौ साल के बाबा फतेह सिंह थे।

जिनकी शहादत पर शीश नवाते हैं,

वीर बाल दिवस के रूप में मनाते हैं।।


🙏रचना-: 

मनोज घिल्डियाल (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० कलीगाड़

वि० ख०- रिखणीखाल, पौड़ी

🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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