स्वामी विवेकानन्द- श्री मनोज कुमार घिल्ड़ियाल

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय युवा दिवस पर प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी द्वारा रचित कविता:-

🙏📝स्वामी विवेकानन्द


माता भुवनेश्वरी देवी की धार्मिकता,

और पिता विश्वनाथ की बौद्धिकता।

बाल नरेन्द्र नाथ को अद्भुत बनाती है,

उत्कण्ठा गुरु रामकृष्ण समीप ले जाती है।।


मिला समाधान जिज्ञासाओं को जब,

शान्त हुआ मन जीवन बदला तब।कश

विश्वधर्म सम्मेलन में प्रतिभाग किया जब,

युवा संन्यासी रूप में उद्भव हुआ तब।।


शिकागो जाकर उन्होंने जब भाषण दिया,

अमरीकी भाई-बहनों कह सम्बोधित किया।

यह सुन जनसमूह मन्त्रमुग्ध हो गया,

अपलक देख ताली बजाता रह गया।।



इसे आध्यात्मिक भाषण कहा गया था,

तब सारे संसार को प्रभावित किया था।

यूरोपीय अखबारों ने ऐतिहासिक कहा था,

और सम्मेलन का प्रभावी व्यक्ति कहा था।।


शीघ्र ही वे फिर विश्व क्षितिज पर छाए,

हिन्दू धर्म, आध्यात्म को फिर रखा जिलाए।

बहुमुखी प्रतिभा से युवाओं को खूब भाए,

यही युवा सन्त स्वामी विवेकानन्द कहलाए।।


🙏रचना:-

मनोज घिल्डियाल (स०अ०) 

रा० प्रा० वि० कलीगाड

वि० ख०- रिखणीखाल, पौड़ी गढ़वाल


*🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड*

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