वीर माधो सिंह भण्डारी-श्रीमती पुष्पा बहुगुणा

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती पुष्पा बहुगुणा श्री  द्वारा रचित कविता:-

📝वीर माधोसिंह भण्डारी

        

एक सिंह रैन्द-वण, 

एक सिंह गाय का। 

एक सिंह माधो सिंह, 

और सिंह काहे का।। 


अग्र पंक्ति माधोसिंह के, 

शौर्य को हैं दर्शाती। 

जिनके शौर्य की गाथाएंँ

भरत भूमि है गाती।। 

 

वक्ष चौड़ा,भुज विशाल, 

और अति बलवान था। 

शत्रु भय से काँपते, 

ऐसा गुंजायमान था।। 


प्रसिद्ध नाम माधोसिंह, 

वीरभद्र उपनाम था। 

सोणबाण कालू भण्डारी, 

पिता का नाम था।।

  

सन् 1595 गाँव मलेथा में, 

जन्म हुआ उस वीर-भड़ का। 

कम उम्र में ही वह वीर, 

राज सेना में शामिल हुआ।। 


वीर शौर्यवान था वह, 

इसलिए सेनाध्यक्ष बना। 

मुगलों और गोरखों में, 

भयंकर भय पैदा हुआ।।

  

माधो सिंह भण्डारी की, 

चहुँ ओर थी गरिमा। 

भारत-चीन की जिन्होंने, 

निर्धारित की थी सीमा।। 


तिब्बती माधो के, 

नाम से ही थे काँपते। 

उनकी वीरता को, 

वे खूब थे पहचानते।।


माधो के गाँव मलेथा में, 

खेत सब सूखे थे। 

गाँव में अधिकांँश लोग, 

गरीब व भूखे थे।। 


माधोसिंह ने पानी, 

पहुँचाने का प्रण लिया। 

दिन-रात सुरंग काटकर, 

गूल का निर्माण किया।।

  


बहुत जतन करने पर भी, 

पानी गूल पर नहीं निकला। 

सहसा ही बेटे गजेसिंह का, 

रक्त गूल में बह गया।। 



आगे रक्त धारा, 

पीछे पानी बहा। 

मलेथा के सूखे खेतों को, 

हरा-भरा कर दिया।।


🙏रचना-

 पुष्पा बहुगुणा (स०अ०)

 रा० उ० प्रा० वि० पिपोला

 वि०ख०- जाखणीधार

 जिला- टिहरी गढ़वाल


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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