नवसंवत्सर 2080- श्रीमती रेखा पुरोहित

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में नवसंवत्सर के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग  से शिक्षिका बहन श्रीमती  रेखा पुरोहित जी  द्वारा रचित कविता:-



🙏🕉️📝नवसंवत्सर 2080


इक नया प्रभात लेकर, 

एक नई उम्मीद लेकर।

आ गया नवसंवत्सर देखो,

कुछ नया सा भाव लेकर।।


आ गई नव कोपलें अब, 

फूल फिर खिलने लगे।

मखमली दूब से फिर, 

ओढ़ ली चुनरी धरा ने।। 


तितली भंँवरे फिर से अब,

मधुर गीत गाने लगे।

महक भीनी फैला रही,

प्रकृति भी चहुँ ओर से।। 


गेंदा, गुलाब, चम्पा, चमेली,

फूलों से खुशबू चुराकर।

आ गया नववर्ष देखो,

महकती इक भोर लेकर।।



उम्मीद का आंँचल पकड़, 

अब नई राहें हम चलें। 

हो मुश्किलें कितनी बड़ी,

पर राह से हम ना डिगें।। 


ज्यों संँवरती है प्रकृति, 

स्वयं को ही बदलकर।

स्वयं को हम भी संँवारें, 

आदतें अपनी बदलकर।। 


पक्षियों की चहक का, 

मधुर सा संगीत लेकर।

आ गया नववर्ष देखो, 

इक नया सा गीत लेकर।।


त्याग दें हम अपने मन की, 

अब सभी दुर्भावना।

छोड़ दें जो भी बुरा था, 

जो बुरी थी कामना।। 



त्याग दें वो आचरण जो, 

दुख का कारण है बना।

पकड़ लें उस राह को, 

जिसमें भरी सद्भावना।।


उम्मीद, हिम्मत, धैर्य का वो, 

फिर तुम्हें हथियार देकर।

आ गया नववर्ष देखो,

आशा की नव किरण लेकर।।


🙏रचना-:

रेखा पुरोहित (स०अ०)

रा० प्रा० वि० सौंराखाल

वि० ख०- जखोली, रुद्रप्रयाग


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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