धूम्रपान निषेध- कु० शालिनी

📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में   प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग से छात्रा कु० शालिनी जी द्वारा रचित कविता:-


📝🚭धूम्रपान निषेध




सुलगी बीड़ी और सिगरेट,


तम्बाकू का करो निषेध।


छोड़ दो यह शौक नशे का,


साथ बुरी लत व नशेड़ी का।।




अभी उम्र ही क्या है तुम्हारी!


अभी तो मंजिल पानी बाकी।


क्यों गला अपना घोट रहे हो,


क्यों सांँसों को रोक रहे हो।।





आदत ये अच्छी नहीं है,


मान लो इस बात को। 


जानलेवा यह शौक है,


छोड़ दो इस शौक को।।




तन कैंसर का घर बनेगा,


श्वास रोग हो जाएगा।


फेफड़े जला देता है ये,


सब कुछ तबाह करेगा ये।।




सड़ जाते हैं फेफड़े इससे,


काले धब्बे पड़ जाते हैं।


जीवन में जो इसे अपनाता,


जीवन भर वो पछताता।।




सब सम्भल जाओ तम्बाकू से,


बीड़ी,सिगरेट सब कुछ त्यागो।


नशा मुक्त हो जाओ इससे,


स्वस्थ, सुखी जीवन अपनाओ।।




जिन्दा क्यों जल रहे हो!


मौत को निमन्त्रण दे रहे हो।


नशा मुक्त जब हो जाओगे,


जीवन में खुशहाली पाओगे।।




इसका प्रयोग करना छोड़ो,


बुरी लत, बुरी संगत त्यागो।


किया तम्बाकू सेवन जिसने,


वार किया दिल पर अपने।।




छोड़ दो ये बुरी है लत,


सेहत और स्वास्थ्य बनाओ।


ताजे फल खाओ, दूध पियो,


धूम्रपान से तुम दूर रहो।




🙏रचना-:


कु० शालिनी( छात्रा) 


 कक्षा- सप्तम 


रा० उ० प्रा० वि० धारकोट


वि० ख०- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग




🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

होली - श्रीमती सुशीला थपलियाल

माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी