श्री गंगा दशहरा- श्रीमती सरोज डिमरी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री गंगा दशहरा पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता:-
🙏🕉️📝श्री गंगा दशहरा
देवी सुरेश्वरि गंगा मैया,
आज करें माँ ध्यान आराधना।
जीवन दायिनी गंगा मैया,
माँ करो हमारी सफल साधना।।
हम श्रद्धा से करते तेरा ध्यान,
पूर्ण करो मन के अरमान।
मांँ तुझको बारम्बार नमन,
मांँ तेरा नीर नहीं, है यह अमृतपान।।
गंगा तू जीवन धारा है,
उत्पादन-उर्वरता देती।
जन-जन की प्यास बुझाती,
जो मांगो वह वर दे देती।।
जीवन दायिनी मांँ गंगा,
निर्मल जल सम रहे भावना।
हम करते तुम्हें हार्दिक नमन,
रहे सफल हमारी साधना।।
शस्यश्यामला धरा बनाती,
मांँ तुम सबका पोषण करती।
फल, फूल सब परिपूरित,
वाँच्छित धान्य भू पर उगाती।।
तेरी मीठी जलधारा,
सबकी प्यास बुझाती।
हो जाती दूषित गन्दी जब,
विकराल बाढ़ बरपाती।।
स्वच्छता का संकल्प लिया है,
नमामि गंगे मैया।
आओ! करें आज आह्वान,
मांँ को दूषित ना करना भैया।।
जल है तो जगजीवन सारा,
बिन जल जीवन हारा।
उद्गम से संगम तट सारा,
हर एक का तुम हो सहारा।।
करो इसका पवित्र आचमन,
प्राणदायिनी मांँ तुझे नमन।
दस दोष को जो हर लेती,
गंगा दशहरा पर माँ तुम्हें नमन।।
🙏रचना-:
सरोज डिमरी (स०अ०)
रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर
विकास खण्ड- कर्णप्रयाग, चमोली
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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