गर्मी का मौसम - श्रीमती सूरी भारती

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सूरी भारती जी द्वारा रचित कविता:-


🙏🌞🌳 ⛱️📝गर्मी का मौसम


आया मौसम अब गर्मी का,

भागा मौसम जी सर्दी का। 

गर्म कपड़े अब नहीं सुहाते ,

पहनो तो पसीना खूब बहाते।। 


सूरज जी भी अब लगे भड़कने,

तेज धूप से पशु  पक्षी लगे तड़पने। 

दोपहर में आती तेज गर्म हवाएँ,

तपती गर्मी से जीव-प्यासे अकुलाए।। 


नदी तालाब भी सब सूख गये,

जाने कहांँ तपती रेत में डूब गये। 

घर में आ गये पंखा, कूलर, ए०सी०,

लू से लगती बीमारी कैसी-कैसी।।



रसना, आमरस, जूश खूब भाते,

आइस-क्रीम, कुल्फी सब खूब खाते। 

आया महीना अब गर्म जून का, 

तेज हवाएँ लायी संकेत मानसून का।। 


आसमान से गिरते मोटे-मोटे ओले,

लगते हैं जैसे नमक चीनी के गोले।

गर्मी ने भाई दिन-रात सताया, 

मच्छर, मक्खियों ने भी शोर मचाया।। 


सूरज दादा अब बस रहम करो, 

थोड़ा गर्मी कम किया करो।। 



🙏रचना-

 सूरी भारती (प्र०अ०) 

रा० प्रा० वि० उठड़

वि० ख०- जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल



🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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