सपनों का संसार - श्रीमती अनिता नौडियाल

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती अनिता नौडियाल द्वारा रचित कविता:-



🙏✍️🌳🦜🦚सपनों का संसार



मेरे नयनों में बसता है,

एक सपनों का संसार।

मैं नन्हा खग बन उड़ूँ,

आसमान में पंख पसार।। 


सुख -दुःख पूछूँ सबका,

घूमकर रोज स्वदेश।

अनन्त उड़ती जाऊंँ,

हर दिन देश-विदेश।। 




कोयल बन जाऊंँ,

पाऊँ सबका प्यार दुलार।

मेरे नयनों में बसता है,

एक सपनों का संसार।। 



या फिर जल बनकर,

बादल में जा समाऊँ,

स्वाति बनकर वापस,

इस धरा पर आऊंँ।। 


कोशिश है कि धरा को,

हरित मैं कर जाऊंँ।

या फिर प्यासे प्राणी की,

इच्छा तृप्त कर पाऊंँ।। 


जीवन सफल करूंँ,

भारत मांँ के पैर पखार।

मेरे नयनों में बसता है,

एक सपनों का संसार।। 


🙏 रचना-:


अनिता नौडियाल(स०अ०) 

 रा० प्रा० वि० मैखण्डी मल्ली

ब्लाॅक- कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल




🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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