आजादी का पर्व- श्रीमती दमयन्ती राणा
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में स्वतन्त्रता दिवस पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती दमयन्ती राणा जी द्वारा रचित कविता:-
आजादी का पर्व
आजादी का यह उत्सव,
जन-गण-मन का पर्व महान।
याद आ रहे वे वीर सभी,
हुए देश के लिए जो बलिदान।।
कितनों ने कारागृह में ही,
जीवन का अवसान किया।
कितनों वीरों ने हंँस-हंँसकर,
फांँसी को गले लगा दिया।।
कितने कष्ट सहे भारत माता ने,
युग समान वह सदी गई।
बड़ी निकट थी कालरात्रि वह,
पराधीनता लदी हुई।।
वतन के खातिर जिन्होंने,
खून अपना दिया बहाकर |
मिलती रहेगी हमें प्रेरणा,
उन्हें अपने दिलों में बसाकर।।
अमर पुत्रों के रहते फिर,
भारत माता त्रस्त न हो।
यह स्वतन्त्रता फले और फूले,
कभी सूर्य यहाँ का अस्त न हो।।
हैं हम आज आजाद,
मनायेंगे आजादी की खुशहाली।
फर्ज है हमारा आखिरी दम तक,
करेंगे देश की रखवाली।।
🙏 रचना
दमयन्ती राणा (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० ईड़ाबधाणी
ब्लाॅक- कर्णप्रयाग, चमोली
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

जयहिंद
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