आजादी का अमृत पर्व-श्रीमती सरोज डिमरी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  आजादी का अमृत महोत्सव 2023 के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता:-


🙏📝🇮🇳आजादी का अमृत पर्व 

आजादी का अमृत महोत्सव,

मना रहा है हिन्दुस्तान।

उन वीरों को श्रद्धाञ्जलि दें,

जो कर गए देशहित बलिदान।। 



 स्वाधीनता दिवस मनाते ,

 हे सूर्यदेव! आशीष हमें दो।

 तन-मन-धन से श्रेष्ठ बनें हम,

 हे गुरुदेव! आशीष दे दो।। 


निर्बल का बल बनकर के हम,

भारत भू का क्लेश हरें।

जो दीन हीन असहाय मिले,

उनके शुभ चिन्तक हृदयहार बनें।। 



परतन्त्र हमें सहन नहीं,

स्वकर्म नया कर पाएंँ हम।

ना परईर्ष्या में जलन भरें, 

नित नूतन चिंतन कार्य करें।। 



शिक्षा से परिष्कृत पूर्ण बनें हम,

प्रभु की परमशक्ति पाएँ। 

जीवन नौका उस पार लगे,

नित्य शुद्ध क्रिया गति पाएँ।। 


तिरंगे ध्वज के रंग जैसे,

सब मिलजुल कर रह पाए हम।

स्वयं दुखें ना दुःख दें किसी को,

समदर्शी तत्वज्ञानी बनें हम।। 



हे अमर पुत्र! आलस छोड़ो!

मानवता से नाता तुम जोड़ो।

यह प्रजातन्त्र है गतिशील,

देश-प्रेम से नाता जोड़ो।। 


भारत भू पर सर्व धर्म रहा,

समभाव सदा वैशिष्ट्य भरा।

मन नील गगन सा विस्तृत हो, 

विचार हरियाली सा हरा भरा।। 



प्रिय देश हमारा सुरक्षित हो,

जब भाव हमारे शुद्ध बनें।

ईर्ष्या का भेद मिटे जग से,

राम-राज्य हमारा स्वप्न बनें।। 

🙏रचना-:

सरोज डिमरी (स०अ०)

रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा

वि० ख०- कर्णप्रयाग, चमोली

 

🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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