आजादी की सुबह है आयी - श्रीमती सूरी भारती
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद-टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सूरी भारती जी द्वारा रचित कविता:
*🙏✍️🇮🇳आजादी की सुबह है आयी*
कितने ही वीर शहीदों ने,
सीने पर हैं गोलियाँ खायी।
तभी आज भारत ने आजादी,
महोत्सव की अलख जगायी।।
यह भारत भूमि थी, सोने की चिड़िया,
देख दुश्मन के मन में लालच आया।
इसे पाने की चाहत में अंग्रेजों ने,
व्यापार का था जाल बिछाया।।
फूट डालो, शासन करो ब्रिटिशों ने,
इस नीति का रंग-भेद फैलाया।
अपनी ही भूमि से भारतीयों को,
नित-नित दर-दर फिर भटकाया।।
यह मंजर देखकर हर देशवासी,
के मन में क्रोध से आक्रोश आया।
अंग्रेजो भारत छोड़ो, भारत छोड़ो,
जन-जन ने यह आन्दोलन चलाया।।
छिड़ा अंग्रेजों के विरुद्ध घमासान,
हर भारतीय ने तब मशाल जलाया।
भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, मंगल,
आदि वीर शहीद चढ़ गये फाँसी पर।।
लक्ष्मीबाई ने भी स्वतन्त्रता संग्राम,
में लड़ते-लड़ते अपना प्राणों को गंवाया।
तब जाकर 15 अगस्त 1947 को,
स्वतन्त्र भारत का है जश्न लोगों ने मनाया।।
🙏रचना-
सूरी भारती (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० उठड़
वि० ख०- जाखणीधार
टिहरी गढ़वाल (उत्तराखण्ड)
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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नवीन किसलय की घाटी से ,
जवाब देंहटाएंकैसे गुलामी का नाम मिटाएं ,
किताबों से गुलामी का हर नाम हटाएं,
अपने नौनिहालों को क्यों ऐसे नाम बता