श्री दत्तात्रेय जयन्ती- श्रीमती सरोज डिमरी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री दत्तात्रेय जयन्ती पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता:-
🙏🏻🕉️📝श्री दत्तात्रेय जयन्ती-सती अनसूइया मेला
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नमो देवी दुर्गा तुम्हीं शारदा हो,
तुम्हीं मात लक्ष्मी, तुम्हीं शारदा हो।
नमन मांँ अनसूइया तेरे द्वार आए,
नमो देव माता तुम्हीं ने रिझाए।।
नमो देवी दुर्गा तुम ही शारदा हो,
जगतपालिनी मांँ तुम्हीं शारदा हो।
मन के अन्धेरे मिटा दो हे माता,
जगत में सभी का तुम्हीं से है नाता।।
तेरा हाथ सिर पर सदा साथ देता,
लक्ष्मी समृद्धि धन का वास देता।
जगतपालिनी सर्व कल्याणकारी,
सदा साथ रहना माँ तुम हो हमारी।।
दया धर्म का भाव मन में बनाना,
मन के कलुष तम को हमसे हटाना।
जगतपालिनी सिन्धु सागर कृपाला,
रही माँ अनसूइया सदा हो दयाला।।
दत्तात्रेय भगवान की तुम हो माता,
महर्षि अत्रि जी की तुम साथदाता।
महर्षि अत्रि की अर्धांगिनी पतिव्रता तुम,
मान-मर्यादा की अधिष्ठात्री देवी तुम।।
त्रिदेव को तुमने बालक बनाया,
स्नेह सिंचन कर गोद खिलाया।
देवों ने जानी, ऋषियों ने मानी,
हे माँ अनसूइया तुम्हारी परम कहानी।।
दुर्गा कल्याणी भव तारिणी माता,
मनोरथ लेके हर कोई तेरे द्वार आता।
दया से भरा है तेरा द्वार भण्डार माता,
श्रद्धा से जो आये झोली भर ले जाता।।
राजा-रंक सदा तेरे गुण गाते,
नमन नतमस्तक शीश झुकाते।।
🙏🏻रचना-:
सरोज डिमरी (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा
वि०ख०-कर्णप्रयाग, चमोली
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड


मि शि सं का हार्दिक धन्यवाद 🙏🙏💐साधुवाद
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुन्दर प्रस्तुति। आपको बहुत बहुत बधाई
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया कविता है। धन्यवाद!
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