घुघूती त्योहार - श्रीमती अमिता क्वीरा
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में उत्तराखण्ड के पावन लोकपर्व घुघूती त्योहार के शुभ अवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहन श्रीमती अमिता क्वीरा जी द्वारा कुमाऊँनी लोक भाषा में रचित कविता:-
🙏🏻📝🕊️घुघूती त्योहार 🕊️
घुघुती को त्यार एगि,
बड़ घुघुत बड़ुल लगि।
ऐ जाओ पहाड़ा,
लागि गो निसासा।।
इज बाब की याद एगि,
दिद मैतै कि बाट लागि।
पू घुघुत टोकर में धरि,
नान्तिना कै काखि में धरि।।
ऐ जाओ पहाड़ा,
लागि गो निसासा।।
बागस्वर में म्यल लगल,
सरयू को तीर सरयू को तीर।
बागनाथा में बॉंधि जाओ,
तुम एबेर चीर तुम एबेर चीर।।
हर बरस ऊन लिजि,
चीर कै खोलण लिजि।
ऐ जाओ पहाड़ा,
लागि गो निसासा।।
रानिबाग कत्यूरी औनी,
सारी रात जाग लगूनी।
गार्गी में डुबुक मारनी,
तुम किलैनि देखि जानि।।
पितरौंक आशीष लिजि,
देवभूमिक मान लिजि।
ऐ जाओ पहाड़ा,
लागि गो निसासा।।
🙏🏻रचना-:
अमिता क्वीरा
रा० प्रा० वि० अमृतपुर
ब्लॉक- भीमताल, नैनीताल
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें