मेरे राम पुनः आ जाओ-पं० जुगल किशोर त्रिपाठी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्रीराम मन्दिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज उत्तर प्रदेश के जनपद- झाँसी से शिक्षक साथी पं० जुगल किशोर त्रिपाठी जी द्वारा रचित कविता:-
🙏🏻🕉️📝मेरे राम पुनः आ जाओ
मेरे राम सुनो अर्जी मम,
बाट तुम्हारी हेरुँ कब से।
आओ सुनलो टेर मेरी तुम,
आँखें प्यासी हैं कब से।।
आज पुकारे जगत तुम्हें है,
अपनी रुप राशि दिखलाओ।
हे जग के आराध्य देव प्रभु,
मेरे राम पुनः आ जाओ।।
बसे राम तुम जन-जन के,
उर में, अति जन-जन हर्षित हैं।
सीताराम जपें प्राणी सब,
हो आराध्य, सब गर्वित हैं।।
रामायण घर-घर में गाते,
चर्चा करते आपस में नर।
भाई राम जैसा न कोई,
रहते इक-दूजे के वश में नर।।
पावन, पुण्य, पुनीत अयोध्या,
सरयू जिस तट बहती है।
देती शीतल, सुखद लहर है,
आओ! सबसे कहती है।।
नारायण हैं राम जानकी,
नारायणी सीता मैया।
भरत, लखन, रिपुसूदन भाई,
परें सभी इनके पैंया।।
मातु-पिता, गुरु, बड़ों को मानो,
प्रेम सहित सब सन्मानो।
भाई-भाई, बहुओं में प्रेम हो,
राम राज्य ये तब मानो।।
राम आयेंगे फिर घर में अब,
काट के फिर वनवास अभय।
होगी प्राण-प्रतिष्ठा इनकी,
नृत्य-गीत संग गूँजे लय।।
आज अभीप्सा पूरी होगी,
राम भ्रात सिय संग आयें।
हर्षित, उल्लासित प्रकृति है,
जन-जन मधुर गीत गायें।।
🙏 *रचना-*
पं० जुगल किशोर त्रिपाठी (स०अ०)
प्रा० वि० बम्हौरी,
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड


बहुत सुन्दर प्रस्तुति! बहुत उत्तम प्रकाशन
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