सावित्रीबाई फुले-श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में देश की पहली महिला शिक्षिका श्रीमती सावित्रीबाई फुले की पावन जयन्ती पर पर प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी द्वारा रचित कविता:-
सावित्रीबाई फुले
महाराष्ट्र के सतारा जिले के,
एक छोटे से गाँव में जन्मी।
समाज सेविका और कवयित्री,
सावित्रीबाई फुले नाम से है भायी।।
भाई-बहनों में सबसे छोटी,
दलित परिवार में जन्मी थी।
पढ़ना-लिखना चाहती थी,
पर पिता ने पढ़ने नहीं दिया।।
9 वर्ष की छोटी सी आयु में ही,
ज्योतिराव फुले संग हुआ विवाह।
पति से पढ़ने की इच्छा जाहिर की,
ज्योतिराव फुले ने दिया पूरा साथ।।
पढ़ने जाती थी जब सावित्रीबाई फुले,
उन पर करते थे लोग बहुत बुरा प्रहार।
फिर भी सावित्रीबाई फुले ने डटकर,
किया सामना और मानी नहीं हार।।
स्वयं शिक्षा को हासिल करके,
जग में कमाया ऊंँचा नाम।
बालिकाओं की शिक्षा के लिए,
1948 में पुणे में खोला बालिका विद्यालय।।
ज्योतिराव फुले के सहयोग से,
उनका संघर्ष हमेशा जारी रहा।
महिलाओं के अधिकारों की,
मिलकर लड़ी लड़ाई बारम्बार।।
महिलाओं को न्याय दिलाया,
छुआछूत को दूर भगाया।
आज भी उनकी गाथा गाते,
नमन करते हम शत-शत बार।।
🙏रचना-:
देवेश्वरी सेमवाल( स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० कान्दी
वि० ख०- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड



बहुत ही शानदार रचना देवेश्वरी जी. आपकी लेखनी को नमन👏👏💐💐
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