जय श्री राम - श्रीमती अनीता नौडियाल

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्रीराम मन्दिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती अनीता नौडियाल जी द्वारा रचित कविता:-



🙏🏻🕉️📝"जय श्रीराम"


राम-मय बच्चा-बच्चा,

राम-मय पूरा देश।

राम ही जग संरक्षक,

राम ही अयोध्या नरेश।।


राजा दशरथ थे पिता,

माता थी कौशल्या माई।

श्री हरि को अयोध्या नगरी,

जन्म धरने को है भायी।।


चैत्र मास, शुक्ल पक्ष,

नवमी तिथि को जन्मे वे।

रघुकुल के भाग्य और,

अयोध्या नगरी के धन्य थे।।



कौशल्या, कैकई, सुमित्रा,

तीन थी उनकी माई।

राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न,

चार थे वे प्यारे भाई।।


धर्म पत्नी सीता मैय्या,

जिनका है उज्ज्वल चरित्र।

हनुमान परम भक्त जिनके,

सुग्रीव जैसे कई मित्र।।



अनगिनत राक्षस मारे,

थे गुरु उनके विश्वामित्र।

लव-कुश से सुन्दर उनके,

जन्में दो प्यारे पुत्र।।


शत्रुता कर बैठा था,

प्रभु श्रीराम से लंकेश।

हे लंकापति! हे अज्ञानी!

वे हैं प्रभु मानव भेष।।


धर्मपथ पर अग्रसर प्रभु,

करने लगे युद्ध भीषण।

सर्वनाश हुआ रावण का,

लंकापति बने विभीषण।।


त्याग, तप और धर्मपालन की,

ये कहानी है अति प्यारी।

रामायण में समाहित है,

प्रभु राम की ये कथा सारी।।


🙏 रचना:-

अनीता नौडियाल (स०अ०)

रा० प्रा० वि० मैखण्डी मल्ली

कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

  1. नवीन प्राण-प्रतिष्ठा वाले चित्र की आभा लिए यह कविता निश्चित ही राम रुप का दर्शन कराती है।

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