महाशिवरात्रि- श्रीमती सरोज डिमरी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी7 साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में महाशिवरात्रि पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-:


🙏🏻🕉️🪷📝महाशिवरात्रि व्रत

 

श्री राम के आदि गुरु 

शिव-शंकर महाराज।

आस्था श्रद्धा भाव की, 

हम पूजा करते आज।। 


आराधना महादेव का, 

मानस पूजन साथ।

पत्र-पुष्प और धूप-दीप, 

लाए प्रभु हम हाथ।। 


चन्द्रकान्ति जब क्षीण है,

चतुर्दशी की रात।

ऐसे अद्भुत संयोग में, 

शिव लाये बारात।। 


परम अलौकिक शक्तियाँ, 

शिव देते वरदान।

पुरुषार्थ सब सिद्ध हो,

जब लेते मन ठान।। 



अद्भुत शक्ति संयोग है, 

गौरा-शंकर विवाह।

मनसा-वाचा-कर्मणा, 

सत्यकर्म निर्वाह।। 


शिव शक्ति प्राकट्य से, 

जीवन बना आसान।

महादेव आराधना से 

मिले अभय वरदान।। 


धर्मशास्त्र करते सदा, 

महादेव का ध्यान।

मोक्ष प्राप्ति होती उसे, 

जो करता जप दान।। 



मोर, सर्प, वृष, व्याघ्र का, 

सुन्दर मेल सुजान। 

मूषक पर अति सोहते, 

गणपति श्री भगवान।। 


 शिव कल्याण का भाव है,

 शिव दम्भ का नाश।

 शिव-शंकर आशुतोष हैं,

 ऋद्धि-सिद्धि का वास।। 


सत्य सनातन संस्कृति, 

आशा और विश्वास।

सदियों से हम कर रहे, 

चतुर्दशी उपवास।। 


आचरण की शुद्धता, 

नारायण समभाव।

उच्चकोटि गुण ही हमें, 

देते सत शिव भाव।। 

  

राम जपें शिव नाम को, 

शिव के प्रभु श्री राम। 

दोनों ही महामंत्र हैं,

सुख देते ये नाम।


फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी, 

महाशिवरात्रि कहलाता। 

फल, दूध, नैवेद्य से, 

करें पूजन दिन रात।। 


🙏रचना-:

सरोज डिमरी (स०अ०) 

 राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय घतोड़ा, 

 क्षेत्र- कर्णप्रयाग, चमोली।



🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड 

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