होली के रंग- डाॅ० आभा सिंह भैसोड़ा
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में होली पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहन डाॅ० आभा सिंह भैसोड़ा जी द्वारा रचित कविता-:
🙏🕉️🙏✍️होली के रंग
होली के जो रंग आये,
मन मुस्काये रे।
फाल्गुन के यह रंग में तो,
डूबा चला जाये रे।।
किसना की ये बाँसुरिया,
मन को लुभाए रे।
मुरलिया की माया से तो,
बचा नहीं जाये रे।।
कि सोचे न समझे न,
बूझा न जाये रे।
होली होली होली आई,
हो SSSSली आयी रे।।
कान्हा की पिचकारी से,
जब, रंग उड़ा जाये रे।
किसकी भीगी है चुनरी?
कौन मुस्काये रे?
भीगी राधा की चुनरी
वही ये बताये रे।
कान्हा ही ने है भिगायी,
रो के वो बतलाए रे।।
जाने न दूँगी, न छोडूँगी
कान्हा रे ........
अरज मेरी सुन लो कान्हा,
छेड़ो न......
*🙏🏻रचना-*
डॉ आभा सिंह भैसोड़ा(स०अ०)
रा० प्रा० वि० देवलचौड़,
हल्द्वानी, नैनीताल
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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