नारी- श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी द्वारा रचित कविता-:
🙏🏻🕉️🪷📝नारी
नारी तू है जग की दाता,
हर जीवन तुझसे ही भाता।
तेरी महिमा, तेरी हर गाथा,
सारा संसार है सबको सुनाता।।
पल-पल तू है कोशिश करती,
साहस, धैर्य सदा बनाये रखती।
अपना हर-पल, हर क्षण है देती,
एक सूत्र में सबको बांँधे है रखती।।
न जाने कितने कष्टों को है ढोती,
फिर भी कभी वह ऊफ तक न करती।
सदा प्रफुल्लित, हंँसते हुए है रहती,
खुश रहकर सब कष्टों को है सहती।।
तेरी महिमा का क्या करें हम गुणगान,
तू तो है सर्वगुण सम्पन्न और महान।
लक्ष्मी, दुर्गा, काली, न जाने कितने रूप,
हर रूप में बसा है संजीवनी जैसा स्वरूप।।
🙏रचना-:
देवेश्वरी सेमवाल (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० कान्दी,
क्षेत्र-अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग।
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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