माँ से ही संसार- श्रीमती रेखा पुरोहित
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में मातृ दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती रेखा पुरोहित जी द्वारा रचित कविता-:
🙏🏻📝माँ से ही संसार
जननी है वो जन्मदात्री,
प्रेम वात्सल्य अपार।
त्याग अरु करुणा बसे,
हृदय बसे अनुराग।।
ममता का भण्डार माँ,
करती सबसे प्यार,
नव जीवन सृजन करे।
माँ से ही संसार।।
उससे ही है चहल-पहल,
हर घर अरु हर द्वार।
माँ के बिन सूना जगत,
माँ अनुपम उपहार।।
माँ होती प्रथम गुरु,
देती सीख हजार।
सच्ची पथ प्रदर्शक वो,
जगत करे आभार।।
माँ की उंँगली थाम कर,
चलना सीखे हर बाल।
प्रथम सबक सीखे वही,
मिले प्रेम हर हाल।।
सौम्य सरल कोमल हृदय,
व्यक्तित्व से छलके प्यार।
जीवन संचित करती वो,
बरसाती प्रेम अपार।।
जग समझे दुर्बल उसे,
पर माँ बच्चे की ढाल।
हित के लिए सन्तान के,
माँ बनती महाकाल।।
माँ इक ऐसा शब्द है,
जिसमें बसे संसार।
अहसास भरा रिश्ता ये,
महिमा जिसकी अपरम्पार।।
🙏 रचना
रेखा पुरोहित (स०अ०)
रा० प्रा० वि० सौंराखाल
ब्लॉक- जखोली, रुद्रप्रयाग
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड


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