हम हैं रक्षक भारत माँ के- श्री ख्याली दत्त
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में मातृ दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- अल्मोड़ा से शिक्षक साथी श्री ख्याली दत्त जी द्वारा रचित कविता-:
🙏🏻🇮🇳📝"हम हैं रक्षक भारत मांँ के"
हम तब तक हैं रक्षक तेरे माता,
जब तक तन में प्राण रहे।
जब तक सूरज चांँद रहेगा,
तब तक तू आवाद रहे।।
तेरी पावन इस मिट्टी में,
पल बढ़ कर हम बड़े हुए।
तेरे सहारे, तेरे बलबूते से,
हम पैरों पर खड़े हुए।।
तेरी गोद में पल बढ़ करके,
आज यहांँ तक आये हैं।
आंँच न आये तेरी शान पर,
हम शपथ उठाए हैं।।
यह शीश तेरे चरणों में भारत,
जब चाहे चढ़ जायेगा।
इस तन के खून का कतरा-कतरा,
एक नया सवेरा लायेगा।।
हम रक्षक बन सीमाओं पर,
तेरा परचम लहरायेंगे।
अगर जरुरत पड़ जायेंगी,
सीने पर गोली खायेंगे।।
सरहद पर तेरे शेर खड़े हों जब,
आंँख दिखाने वाला कौन।
तेरे सम्मुख घुटने टेके,
सारी दुनिया होंगी मौन।।
🙏रचना-:
ख्याली दत्त (स०अ०)
रा० प्रा० वि० सकनणा
ब्लाक - सल्ट, जिला अल्मोड़ा
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

.jpeg)
बहुत सुन्दर प्रस्तुति! जय भारत!
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर कविता रही है आपकी देशभक्ति के ऊपर।
जवाब देंहटाएं