माँ का स्वरूप- श्रीमती सुशीला थपलियाल

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में मातृ दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती  सुशीला थपलियाल जी द्वारा रचित कविता-:



🙏🏻📝माँ का स्वरूप 


माँ तेरे स्वरूप का क्या वर्णन करुंँ? 

तू राग है, तू प्यार है, तू ही मेरा संसार है। 

तू हृदय की अन्तस्थली का वो तार है,

जिसके निनाद में सांँसों का विस्तार है।। 



तू सावन की फुहार है,

बसन्त की आहटों का द्वार है। 

खिलखिलाते पुष्पों में, 

मंडराते भंँवरों सा तेरा प्यार है।।


प्रकृति की हर छटा में तेरा रूप है, 

सुन्दर सुशोभित अकल्पनीय, तेरा स्वरूप है। 

इन चक्षुओं के स्वप्न का तू आधार  है, 

बहते दृगों में ओंस की बूंँदों सा तेरा प्यार है।। 



ये सच है कि तू अब नहीं मेरे पास है, 

पर मेरी हर धड़कन में सदा तेरा वास है। 

तू भी हरपल निहारती होगी मुझे, 

बस तेरे होने का ही एहसास है।। 



इस तसल्ली में सदा जीती हूँ मैं,

कि तू यहीं, कहीं मेरे आस-पास है।

हर वक्त  राह तकती हूंँ तेरी,

माँ मुझे तेरे मिलन की आस है।।


🙏रचना-:

सुशीला थपलियाल(प्र०अ०) 

रा० प्रा० वि० पपड़ासू

वि० ख०-जखोली, जनपद-रुद्रप्रयाग









🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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