काफल- श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में उत्तराखण्ड के राज्य फल के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट जी द्वारा रचित कविता-:


*🙏🏻📝काफल*


देव भूमि का प्यारा फल,

कहते जिसको हम काफल,

अप्रैल-मई में पकता फल,

खट्टा-मीठा, रसीला काफल।।


वन्य पशुओं की भूख मिटाता फल,

जिसको कहते हम काफल।

रोजगार का साधन ये फल,

काला-काला मीठा काफल।।


पथिकों की प्यास मिटाता फल,

देवभूमि का प्यारा काफल।

संरक्षण की पुकार करता फल,

प्यारा-प्यारा ये काफल।।



जल रहे जंगल, मिट रहा फल,

जंगल बचाओ कहता काफल।

उत्तराखण्ड का प्यारा फल,

जिसको कहते हम काफल।।



औषधीय गुणों से भरपूर फल,

खट्टा-मीठा ये काफल।

दीदी-भैजी मिलकर बोलो,

हम बचायेंगे अब काफल।।


देवभूमि का प्यारा फल,

जिसको कहते हम काफल।।


🙏रचना

 गोविन्द बल्लभ भट्ट (मुसाफिर)

रा० आ० प्रा० वि० -अजेडा 

डीडीहाट पिथौरागढ़




🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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