गुरु की महिमा- श्रीमती उषा सागर
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "गुरु पूर्णिमा" के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती उषा सागर जी द्वारा रचित कविता-:
🙏🏾🕉️🙏🏾✍️गुरु की महिमा
गुरु की महिमा सबसे महान,
नित-नित पूजे सारा जहान।
मात-पिता, गुरु, देव समान,
सबसे ऊंँचा है उनका स्थान।।
अक्षर ज्ञान हमें कराएंँ,
नयी-नयी बातें बतलाएंँ।
ज्ञान के दाता गुरु महान,
नित नित पूजे सारा जहान।।
गुरु ज्ञान के हैं भण्डार,
देते ज्ञान हमें अपार।
उनका हृदय बड़ा विशाल,
निष्ठा, संयम, नेतृत्व बेमिसाल।।
कच्ची माटी को देते हैं,
नये-नये सांँचों में ढाल।
उनके हाथों की कला महान,
नित-नित पूजे सारा जहान।।
जीवन में भर देते हैं वे,
सद्गुण और ज्ञान अपार।
अज्ञानता का अंधकार मिटा,
करते जीवन का उद्धार।।
शास्त्र, साहित्य, गुण, धर्म,
काव्य, ग्रन्थ और पुराण।
नये-नये आयाम देकर,
करें भविष्य का निर्माण।।
सदा उनका ही हो गुण गान,
नित-नित पूजे सारा जहान ।।
गुरु से बड़ा न कोई हितैषी,
गुरु बिना शिक्षा कैसे होती।
गुरु जीवन की आधारशिला,
उनसे ही ज्ञान अपार मिला।।
गुरु अज्ञान का अन्धकार भगाते,
नयी चेतना, उत्साह, उमंग जगाते।
नि:स्वार्थ शिक्षा का देते दान,
नित-नित पूजे सारा जहान।।
धूल उठाकर फूल बनाएंँ,
दुर्गुण रूपी शूल हटाएंँ।
उनके हाथों में जीवन पतवार,
भव सागर से दें पार उतार।।
चाहे डांँटें लाख हमें पर,
मन में छिपा है प्यार-दुलार।
दृष्टि कहीं भी हो लेकिन,
होता हम पर ही है ध्यान,
नित-नित पूजे सारा जहान।।
🙏रचना-:
उषा सागर (स०अ०)
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गुनियाल
विकास खण्ड- जयहरीखाल, पौड़ी गढ़वाल
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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