गुरु की महिमा- श्रीमती सरिता भट्ट

📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "गुरु की महिमा को बताते हुए प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरिता भट्ट जी द्वारा रचित कविता-:


🙏🏾🕉️ 🙏 ✍️गुरु की महिमा


गुरु चरणों में आनन्द अपार,

गुरु ज्ञान के हैं भण्डार।

गुरु करें भक्तों का उद्धार,

गुरु चरणों में है आनन्द अपार।।


गुरु चरणों में जो झुकता है,

होता है वो किस्मत वाला।

मेरा-तेरा क्यों करता है!

गुरु बिन कोई न तरता है।।


लगी है किस्ती उसकी किनारे ,

आये जो गुरु द्वार पे।

गुरु चरणों की महिमा भारी,

गुरु जैसा नहीं कोई हितकारी।।


उनको मिलता ज्ञान निराला,

डेरा जो गुरु द्वार पर डाले।

जिस पर निराली नजरें डाली,

खुलते उसके भाग्य के ताले।।



बिन मांँगे सब कुछ मिलता है,

जो गुरु द्वार पर आता है।

गुरुजी जिनके मन में बसते,

कभी नहीं वह जग में फंँसते।।


हो जाता है निहाल वो,

गुरु द्वार पर आता जो। 

गुरु जी से कभी दूर ना होना,

इनके बिना है जीवन सूना।


पूरी होती सारी मुरादें,

आये जो गुरु द्वार पे।

जग में आकर सबको सँवारे,

नाम ही इनका भव से तारे।।


शरणागत जो गुरु के आये,

पार वो इस भव से पाए।

निश दिन गुरु का ध्यान लगाऊँ,

गुरु के ही गुणगान मैं गाऊँ।।


कृपा सब पर मेरे गुरुवर,

आये जो गुरु द्वार पर।

गुरु चरणों में आनन्द अपार,

गुरु ज्ञान के हैं भण्डार।।


🙏रचना-:

 सरिता भट्ट (प्र०अ०) 

रा० प्रा० वि० फलई 

वि० ख०- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग



🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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