रक्षाबन्धन - माधव सिंह नेगी

📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में रक्षाबन्धन पावन पर्व प्रस्तुत है रक्षाबन्धन त्योहार मनाने पर आधारित एक कविता-:




🙏🏾🕉️🙏🏾✍️रक्षाबन्धन 




श्रावण शुक्ल 15 वीं तिथि,

कहलाती है पावन पूर्णिमा। 

सतयुग से ही श्रावण पूर्णिमा,

सनातन धर्म की है रक्षा तिथि।।




हुआ इन्द्र वृत्तासुर घोर संग्राम, 

इन्द्रपत्नी शची ने दी इन्द्र को विदाई। 

बाँधा उनके हाथ रक्षा का विधान, 

ये पावन घड़ी श्रावण पूर्णिमा को आयी।। 


वामन रूप रख्यो प्रभु नारायण, 

बलि को पाताल लोक पहुंचाये। 

नारायण से बलि ने की याचना, 

रहो मेरे घर, यह मेरी प्रार्थना।। 


माता लक्ष्मीजी पड़ी गहन सोच में, 

सावन पूर्णिमा को गयी पाताल लोक में। 

राजा बलि को बनाया अपना भाई, 

बलि को रक्षा सूत्र तब बांध आयी।। 



दक्षिणा बलि ने जब देनी चाही, 

लक्ष्मीजी ने प्यार से कही ये वाणी। 

यदि दक्षिणा तुम देना चाहते हो भाई, 

मुझे मेरे पति वापस दे दो मेरे भाई।।




राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर ने किया,

अग्रपूजा का सम्मान कृष्ण को दिया।

शिशुपाल ने किया इसका घोर विरोध,

प्रभु ने धड़ से सिर उसका अलग किया।। 




सुदर्शन की अति तेज धार से, 

श्रीकृष्ण की उंगली कट गयी। 

फाड़ा द्रौपदी ने साड़ी का पल्लू,

प्रभु की उंगली पर प्यार से बांधी।। 






दिया वचन प्रभु ने बहिन द्रोपदी को, 

तेरे ऊपर कभी आँच न आने दूंँगा। 

रक्षा करूंँगा अनवरत आजीवन तेरी, 

भाई-बहिन का सच्चा धर्म निभाऊँगा।। 





यह दिन भी श्रावण पूर्णिमा का था, 

जो भारत के इतिहास में अमर हो गया। 

रक्षाबंधन के पावन पर्व मनाने का, 

यह हेतु भी विश्व प्रसिद्ध हो गया।।






🙏🏾रचना-:

 माधव सिंह नेगी (प्र०अ०) 

रा० प्रा० वि० जैली 

ब्लाॅक-जखोली, रुद्रप्रयाग।

🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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