श्रीकृष्ण जन्माष्टमी- माधव सिंह नेगी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है बलराम, श्रीकृष्ण एवं योगमाया के जन्म की कथा पर आधारित कविता-:


🙏🏾🕉️🙏🏾✍️श्रीकृष्ण जन्माष्टमी



वर्षा ऋतु कृष्ण भाद्रपद मास, 

भरणी नक्षत्र चन्द्र दिवस खास।

माता रोहिणी पिता वसुदेव। 

तिथि षष्ठी को जन्मे बलदेव।। 


वर्षा ऋतु भादों का मास, 

द्वापर में धरती के लिए खास। 

कृष्ण पक्ष की तिथि अष्टमी, 

कहलाती कृष्ण जन्माष्टमी।। 


रोहिणी नक्षत्र दिवस बुधवार, 

मध्य रात्रि अरु कंस कारागार। 

देवकी-वसुदेव बने मात-पिता, 

नारायण ने लिया मनुज अवतार।।


बाहर थी घनघोर घटा छायी, 

योग माया भी धरती पर आयी। 

नन्द बाबा घर गोकुल धाम, 

माता बनी यशोदा मायी।।


मध्य रात्रि घनघोर अन्धेरा, 

सैनिक दे रहे थे जब पहरा। 

योगमाया ने माया फैलाई, 

सबको घनघोर निन्द्रा आयी।। 



तब चतुर्भुज रूप लिया प्रभु ने,

मात-पिता से कहा प्रभु ने।

गोकुल मुझको छोड़ आओ,

वहाँ से कन्या उठा कर लाओ।।


नन्द-यशोदा घर जन्मी कन्या,

उसे गोकुल से मथुरा लाओ। 

कंस को सौंप उस कन्या को, 

माया उसकी फिर तुम देखो ।। 


प्रभु ने लिया जब बाल स्वरूप, 

खुली गयी बेड़ियाँ खुल गये ताले। 

फिर वसुदेव प्रभु को सूप पर रख,

चलते-चले यमुना किनारे।।


घनघोर वर्षा थी रात अंधेरी,

शेषनाग बने प्रभु की छतरी।

यमुना मायी उछल रही थी,

प्रभु दर्शन के लिए तरस रही थी।।


यमुना ने अपना जल बढ़ाया,

प्रभु ने झट से पाँव पसारा।

छू कर यमुना तृप्त हुई,

दिया रास्ता संकीर्ण हुई।।


पहुँचे गोकुल, आधी रात में,

रखा प्रभु को नन्द धाम में,

चुपके कन्या वहाँ से उठायी,

पहुंचे वापस मथुरा धाम में।।


लग गयी बेड़ियाँ लग गये ताले, 

कन्या जोर से लगी चिल्लाने।

पहरेदार सब हो गये खड़े, 

उठ कर भागे कंस बुलाने।।


झटपट पहुंचा कंस कारावास,

खींचा शिशु को दिया पटकाय।

कन्या उड़कर गयी आकाश में, 

अष्टभुजा रूप रखा क्षण भर में।। 


बोली मूर्ख! क्यों मुझे तू, 

मारने की चेष्टा करता है।

तुझे मारने वाला तो अब भी, 

गोकुल में पलता-बढ़ता है।। 


इतना कह कन्या अन्तर्ध्यान हुई,

माया अपनी वो दिखा गयी।

क्या थी माया समझ न आयी

पर चिन्ता कंस की बढ़ा गयी।।





🙏रचना-:

माधव सिंह नेगी (प्र०अ०) 

रा० प्रा० वि० जैली, वि० ख०-जखोली, रुद्रप्रयाग।




🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुन्दर कविता..
    पूरे मिशन शिक्षण संवाद परिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनाएं

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