हिन्दी अपनी पहचान- श्रीमती अनिता काला

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है हिन्दी भाषा की महत्ता को बताते हुए जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती अनिता काला जी द्वारा रचित कविता-:


🙏🏾✍️हिन्दी अपनी पहचान


हिन्दी प्यारी है हमें,

भारत मांँ की शान।

हिन्दी दिवस मना रहे,

है हमको अभिमान।।


ये भाषा मीठी लगे,

ज्यों मिसरी की खान।

ये सबको है जोड़ती,

अपनी है पहचान।।


अंग्रेजी के सामने,

इसे बचाओ आज।

गर्वित होते हम सदा,

करना इस पर नाज।।


कितने ग्रन्थ लिखे गए,

रचे कई इतिहास।

हिन्दी भाषा प्रेम की,

लगती सबसे खास।।


आज शपत ये लीजिए,

देना इसको मान।

वरना हिन्दी बिन कभी,

नहीं मिले सम्मान।।



तुलसी सूर कबीर ने,

भरदी इसमें जान।

भाषा ये आगे बढ़े,

नित रहे स्वाभिमान।।


🙏रचना-:

अनिता काला (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० जुंटाई, बच्छणस्यूंँ, 

वि० ख०-  अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग।


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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