हिन्दी हो तुम-श्रीमती सुशीला थपलियाल
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, हिन्दी की महत्ता को समझाती हुई जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन सुशीला थपलियाल जी द्वारा रचित कविता-:
🙏📝हिन्दी हो तुम
भावनाओं को जगाये वो हो तुम,
स्तब्धता को जो मिटाये वो हो तुम।
शूरवीरों को ललकारे वो हो तुम,
हृदय में नव सृजन भर दे वो हो तुम।।
वेदों की वाणी में जो बसी हो वो तुम,
पुराणों की गाथा जिसने लिखी वो हो तुम।
सत्यमेव जयते में विरचित वो हो तुम,
वीर गाथाओं को सहेजती वो हो तुम।।
देश का इतिहास कहती वो हो तुम,
मन के उद्दवेगों में बहती वो हो तुम।
अश्रु स्वर को जो सहलाये वो हो तुम,
कवि की कल्पना में समाये वो हो तुम।
हृदय में अनुराग भरती वो हो तुम,
दिव्य स्वर में जो निकलती वो हो तुम।
शहीदों की गाथा जो विरचती वो हो तुम,
वीरगाथाओं को गाती वो हो तुम।।
कल्पनाओं में भटकती वो हो तुम,
स्वप्न को साकार करती वो हो तुम।
हृदय जो झंकृत करे वो हो तुम,
उल्लास जीवन में भरे वो हो तुम।।
🙏🏾रचना-:
सुशीला थपलियाल (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० पपडासू
वि० ख०- जखोली, रुद्रप्रयाग।
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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