ज्ञान पुंँज शिक्षक-डाॅ० सुमन विष्ट जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है गुरु की महत्ता को समझाती हुई जनपद- अल्मोड़ा से शिक्षिका बहिन डाॅ० सुमन विष्ट जी द्वारा रचित कविता-:


🙏🕉️🙏📝ज्ञान पुँज शिक्षक


अपने ज्ञान की ज्योति से, 

जो सारे जग को महकाते हैं,

वही तो शिक्षक कहलाते हैं।

जाड़ा,गर्मी या हो बरसात,

जो हर पल अपना फर्ज निभाते हैं,

वही तो शिक्षक कहलाते हैं।।


बच्चों के संग बच्चा बनकर, 

बड़ों को भी दुनियादारी सिखाते हैं,

वही तो शिक्षक कहलाते हैं।

ज्ञान की जो बातें बताते, 

सत्य के पथ पर चलना सिखलाते हैं,

वही तो शिक्षक कहलाते हैं।।


धर्म-अधर्म की बात बताते, 

विज्ञान के प्रयोग कराते हैं, 

वही तो शिक्षक कहलाते हैं।

अच्छे-बुरे की पहचान कराकर,  

अधिकार और कर्तव्य हमें समझाते हैं,

 वही तो शिक्षक कहलाते हैं।।


स्थिति प्रतिकूल हो या अनुकूल,

जीवन पथ पर आगे बढ़ना सिखलाते हैं,

वही तो शिक्षक कहलाते हैं।

ज्ञान, बुद्धि ,विवेक और साहस की,

सौगात जो हमको दे जाते हैं,

वही तो शिक्षक कहलाते हैं।।



जीवन पथ पर प्रेरणा स्रोत बनकर,

जो हमारा मार्ग आलोकित कर जाते हैं, 

वही तो शिक्षक कहलाते हैं।

ऐसे शिक्षकों के चरणों में,

हम बारम्बार प्रणाम करते हैं,

बारम्बार नमन हम करते हैं।।


🙏 रचना-:

डॉ० सुमन बिष्ट (प्र०अ०) 

रा० प्रा० वि०  इजरूवा मनारी

वि० ख०- ताड़ीखेत, अल्मोड़ा


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

होली - श्रीमती सुशीला थपलियाल

माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी