पढ़ाई बेटियाँ हमने- श्रीमती अनिता काला
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, शक्ति उपासना के महापावन पर्व नवरात्रि के शुभारम्भ पर नारी के अस्तित्व को बताती हुई जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका अनिता काला जी द्वारा रचित कविता-:
🙏🏾🕉️🙏🏾✍️पढ़ाई बेटियाँ हमने
जहांँ पूजी कभी नारी,
वहांँ अपमान होता है।
बने हैं भेड़िए मानव,
जमाना देख रोता है।।
मनुज तन में यहांँ दानव,
सभी को नोंक खायेगा।
पढ़ाई बेटियाँ हमने,
बचाने कौन आएगा।।
बड़ी गमगीन हालत है,
हृदय में वेदना भारी।
डरी सहमी सदा रहती,
लुटी है आज क्यों नारी।।
हमारे घर की फुलवारी,
बता कैसे सजाएगा।
पढ़ाई बेटियांँ हमने,
बचाने कौन आएगा।।
उठो अब बैठ मत रहना,
सबक इनको सिखाना है।
उठा लो हाथ में बरछी,
न अब कैंडिल जलाना है।।
मिटेंगी बेटियाँ कब तक,
इन्हें कब तक सताएगा।
पढ़ाई बेटियाँ हमने,
बचाने कौन आएगा।।
उठो बेटी बनों काली,
तुझे इनको मिटाना है।
बहुत ही सह चुकी हो अब,
खड्ग तुमको उठाना है।।
जगाओ शक्ति वो अपनी,
नवल जो क्रान्ति लाएगा।
पढ़ाई बेटियाँ हमने,
बचाने कौन आएगा।।
🙏रचना-:
अनिता काला (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० जुंटाई, बच्छणस्यूंँ,
वि० ख०- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग।
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड
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