मंगलमयी नववर्ष- श्रीमती रेखा पुरोहित

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "आँग्ल नववर्ष 2025" के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन रेखा पुरोहित जी द्वारा रचित कविता-:


     ‌‌‌   ‌‌‌‌ ‌‌‌  ‌‌  🙏🏾🕉️✍️ ‌‌मंगलमयी नववर्ष


नूतन नव यह वर्ष है, आया ले उल्लास।

खुलकर ये जीवन जिएंँ, भर मन में फिर आस।।1।।


जीवन नव संकल्प लें, छोड़ पुरानी बात।

आयेगा रवि ले खुशी, बीते काली रात।।2।।


सारा जग खुश हो रहा, मना रहा नववर्ष।

खुशियांँ सबकी देखकर, होता मन में हर्ष।।3।।


दिवस, दिनांक बदल गए, बदल गया है साल।

अपने हर संकल्प को, जीवन में अब ढाल।।4।।


छोड़ो! क्या अब तक हुआ, नई बना लें रीत।

करके हम कोशिश नई, अब रच लें नवगीत।।5।।


क्षमा दया का भाव भर, दूर करें हर त्राण।

अपने हर इक कर्म से, करें जगत कल्याण।।6।।


दुख चिन्ता सबकी मिटे, कष्ट रहें सब दूर।

आंँखों में सबकी सदा, खुशियांँ हों भरपूर।।7।। 


सबके ही घर द्वार में , भरे रहें भंडार।

उपजाऊ धरती रहे,  पेट भरे संसार।।।8।।



सुखमय ये नववर्ष हो, बढ़े सभी में प्यार।

राग द्वेष सब दूर हों, हो न कहीं तकरार।।9।।



अवलोकन स्व का करें, फिर लाएंँ बदलाव।

मन वाणी अरु कर्म में, रहे सदा समभाव।।10।।


🙏 रचना-:

रेखा पुरोहित (स०अ०)

रा० प्रा० वि० सौंराखाल 

वि० ख०- जखोली, रुद्रप्रयाग


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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