📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "आँग्ल नववर्ष 2025" के शुभारम्भ की "मधुर बेला" पर प्रस्तुत है, जनपद- चमोली से शिक्षिका बहिन सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-:


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नव वर्ष 2025 मंगलमय हो 






नव-नूतन की नयी बधाई,

मनमोहक ठण्ड है छायी।

ओंस, कोहरा, पाला, बर्फ भी,

दिसम्बर माह की करते विदाई।। 



साल महीने चलते रहते,

जवानी के दिन भी ऐसे हैं ढलते।

कोई नहीं अजर, अमर रहता, 

सब अपने किस्से कहानी कहते।। 



सूरज, चन्दा दोनों को देखो! 

बारी-बारी फेरे लगाते।

एक उदय एक अस्ताचल देखो! 

शाश्वत प्रकृति के नियम सिखाते।। 



दशा और दिशायें चलती, 

पृथ्वी को गतिशील बनाती।

आओ करें अनुसन्धान नया, 

इतिहास की नयीं कहानी बनती।। 



अवनि और अन्तरिक्ष बना है,

पवन पानी सब संसार बना है।

अथवा, शायद, किन्तु, परन्तु से, 

प्यारा सा व्यवहार बना है।। 


 लाभ-हानि, सुख-दु:ख समय के, 

 मन ही मन के भाव बनाएँ।

 बुरे विचार हटाकर देखो, 

आशा के कुछ दीप जलाएंँ।। 



आओ! नव अभियान सजाएंँ 

नव वर्ष की खुशी मनाएंँ।

दुनियादारी चलती जाये, 

स्वयं भी मन की सन्तुष्टि बढ़ाएंँ।। 



अवनि और अन्तरिक्ष बना है,

द्वित्व भाव संसार बना है।

लाभ-हानि, सुख-दुःख समाये,

जन-जीवन व्यवहार बना है।। 


आशा-विश्वास जगाएँ मन में,

मंगलमय शुभकामना जीवन में।

संभल न पाये जो यौवन में,

मुस्कुराए क्या! पतझड़ में।। 


हॅंसने रोने का बहाना,

कर देता मन को दीवाना।

आनन्द तो अन्तर्मन में उपजे,

क्या! बुद्धू, क्या! वीर सयाना।। 


बदल रहे विकसित होकर हम, 

बदल रहे देश और जमाना।

सतत मनन और चिन्तन से,

सिद्धि-प्रसिद्धि यश कीर्ति कमाना।


🙏 रचना-:

सरोज डिमरी (स०अ०)

रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा 

विकासखण्ड- कर्णप्रयाग, चमोली।


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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