नारी तू महान है - श्रीमती सुनीता भटनागर
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुनीता भटनागर जी द्वारा रचित कविता-:
🙏✍️ नारी तू महान है!
नारी तू जीवन सार है,
मात-पिता की शान भी।
दो कुलों की आन-बान है,
तू ही अर्पण और समर्पण भी।।
ममता की तू खान है,
सन्तान का अभिमान भी।
लक्ष्मी और शक्ति तू है,
शिवजी का गुमान भी।।
नरी नहीं तू जहाँ है
यामिनी भी दामिनी भी।
अन्त और अनन्त तू है,
कण-कण में विराजमान भी।।
नटी सी तू चंचल है,
पर आकाश सा आंचल भी।
धूल का कण है तो,
इमारत की ईंट भी।।
दर्पण सी साफ है,
तो तू अक्स भी।
लाख बंदिशों में,
आजाद पंछी भी।।
तू जिन्दगी की हकीकत,
ममता की मूरत भी।
हालात से ना हारी है जो,
वह मजबूत साख भी।।
कहीं पिता की छाया बन,
बनती तू सहारा भी।
तो कहीं भाई-बहन का,
प्यार और संबल भी।।
तू जीवन्त है,
साकार है, समाधान है।
नारी तू महान है,
इस धरा की शान है।
नारी तू महान है,
इस धरा की शान है।।
🙏 रचना-:
सुनीता भटनागर (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० पनिया मेहता
भीमताल, नैनीताल
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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