राम लला शत्-शत् अभिनन्दन - श्रीमती सुशीला थपलियाल
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में श्रीराम नवमी पुण्य पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुशीला थपलियाल जी द्वारा रचित कविता-:
🙏🏾🕉️✍️राम लला शत्-शत् अभिनन्दन
राम लला शत्-शत् अभिनन्दन,
श्याम स्वरूप मृदुल मधु चन्दन।
अयोध्या की पावन धरती में,
आप विराज गये सुख वन्दन।।
दशरथ सुत कौशल्या माई,
लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न भाई।
मनुज रूप में हुये अवतरित
दनुजों से मुक्ति दिलायी।।
जनक सुता अति सोम्य स्वरूपा,
पायी सिया स्वयंवर जीता।
पग-पग साथ निभाया रघुपति का,
मान बढ़ाया अपने कुल का।।
केवट ने तब महिमा गायी,
पार सिन्धु करा नहीं ली उतराई।
पिता बचन को खूब निभाया,
भक्त रूप हनुमान को पाया।।
पापों से बाली को मुक्त कराया,
सुग्रीव को राज मुकुट पहनाया।
राक्षस कुल में जन्मा रावण,
अति विद्वान जाति थी ब्राह्मण।।
रावण को मुक्ति देकर प्रभु ने,
विभीषण को लंकापति बनाया।
सुन्दर प्यारे दो सुकुमार,
लव कुश देख उर हर्षाया।।
हाथ जोड़ करते हैं वन्दन,
खुशहाली देना रघुनन्दन।
श्याम स्वरूप मृदुल मधु चन्दन,
राम लला शत्-शत् अभिनन्दन।।
🙏🏾रचना-:
सुशीला थपलियाल (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० पपड़ासू
वि० ख०- जखोली, रुद्रप्रयाग
संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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