फूलदेई त्योहार - श्रीमती अनिता नौडियाल जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में 'फूलदेई त्योहार' के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती अनिता नौडियाल जी द्वारा रचित कविता-:
"फूलदेई "
आया फूलदेई का त्योहार,
पूजें घोघा माता।
बच्चों की अहम भूमिका,
प्रकृति से है नाता।।
पारम्परिक परिधान में,
नन्हे मुन्ने गीत गायें।
सारे मिलाकर एक साथ,
कुसुम तोड़कर लायें।।
इन फूलों को घर-घर जा,
देहरी पर सजाएंँ।
प्यार से झूमें-नाचें-गायें,
सारे मौज मनाएंँ ।।
दिल से दिल मिलता,
हर घर फूलों से सजता।
खुशी का यहाँ आलम,
उत्साह सब पर छाता।।
मान्यता है यह त्योहार,
लाता ढेरों खुशहाली।
विभिन्न फूलों से लदी रहे,
जब हर एक डाली।
वसन्त ऋतु में आये,
नयी उमंग के साथ।
अनोखी खुशबू महकाता,
चमन जब दिन-रात।।
शुरू होता चैत्र संक्रान्ति से,
यह त्योहार प्यारा।
बैशाखी तक मनाने का,
है रिवाज हमारा।।
🙏रचना-:
अनिता नौडियाल (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० चौकी तल्ली
कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल
संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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