मेरी पावन धरती--श्रीमती लक्ष्मी काला

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती लक्ष्मी काला जी द्वारा रचित कविता-:


🙏🏾✍️🌎मेरी पावन धरती



पवित्रता पावन धरती की,  

बरकरार सदा रखूंँगी मैं।

गंगा-यमुना के निर्मल जल को,

कभी न अपावन होने दूँ मैं।

इतना तो कर सकती हूँ मैं।।


प्रदूषण को दूर करने की,

जिद जो मैंने ठान ली है।

भारत माँ के पवित्र आँगन में,

चरण न धूमिल होने दूँ मैं।

इतना तो कर सकती हूँ मैं।।


ये उपकार कभी न भूलूँ ,

रज अपने माथे पर ले लूँ।

मेरे देश के हर एक गाँव की,

खुशहाली बनाये रख लूँ मैं।

इतना तो कर सकती हूँ मैं।।


इस पावन धरती के हित,

सर्वस्व समर्पण कर लूँ मैं।

इस मिट्टी की खुशबू को,

इस अन्तर्मन में बसा लूँ मैं।

इतना तो कर सकती हूँ मैं।।



पर्यावरण की स्वच्छता को,

कभी न घटने दूँगी मैं।

अपना ध्येय बना करके,

इस मिट्टी में ही मिल जाऊँ मैं,

इतना तो कर सकती हूँ मैं।।




🙏रचना-:

लक्ष्मी काला (प्र० अ०)

रा० उ० प्रा० वि० सूर्यगाँव

वि० ख०- भीमताल, नैनीताल





*🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड*

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