नशा उन्मूलन-श्रीमती सरोज डिमरी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "नशा उन्मूलन" के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद- चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-:
🙏🏾✍️ 🚭नशा अभिशाप है
तम्बाकू छोड़ो, धूम्रपान से डरो।
जीवन मिला अनमोल है,
इस व्यथा को दूर भगाओ,
स्वयं से और अपनों से प्यार करो।
एक संकल्प ,स्वस्थ जीवन के लिए,
थोड़ा सा वक्त अपनी सेहत के लिए।।
नशा नाश का मूल है,
परिवार के लिए शूल है।
मानसिक दुर्बलता इससे होती है,
नशा जीवन की भूल है।।
दारू पीकर के तुम लड़ते हो,
पागल बनकर फिरते हो।
पत्नी बच्चों का सुख शान्ति,
उनसे तुम छीना करते हो।।
तम्बाकू, खैनी ,गुटखा, बीड़ी,
बर्बादी से मौत की है सीढ़ी।
जिम्मेदारी कुछ अच्छा करो,
इससे सुधरेगी हर पीढ़ी।।
नशाखोर का बेड़ा गर्क,
जीवन होता इससे नर्क,
बेहोशी की हालत होगी,
नहीं रहता कोई तर्क।।
मनोविज्ञान को समझेगा,
तेरा जीवन सुखमय होगा।
स्वस्थ परिवार सुखी संसार,
जब तू नशामुक्त खुद होगा।।
🙏🏾रचना-:
सरोज डिमरी (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा
वि०ख०- कर्णप्रयाग, चमोली
संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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