गुरु पूर्णिमा- श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में गुरु पूर्णिमा पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट जी द्वारा रचित कविता-:
🙏🏾✍️गुरु पूर्णिमा
मात-पिता के बाद,
जो पूजे जाते हैं,
वो गुरुवर कहलाते हैं।।
कच्ची माटी को गढ़कर,
जो मूरत बना देते हैं,
वो गुरुवर कहलाते हैं।।
जो कर्ता न कर सके,
वो करके दिखलाते हैं,
वो गुरुवर कहलाते हैं।।
बनकर पारस जो,
लौह को स्वर्ण बनाते हैं,
वो गुरुवर कहलाते हैं।।
अपूर्ण जीवन शिष्य का,
जो पूर्ण बना देते हैं,
वो गुरुवर कहलाते हैं।।
बन परछाई पग-पग पर,
शिष्य का साथ निभाते हैं,
वो गुरुवर कहलाते हैं।।
नवज्योति जीवन में जला,
जो तम को हर लेते हैं,
वो गुरुवर कहलाते हैं।।
धैर्यता का पाठ पढ़ा,
जो संकट से सदा बचाते हैं,
वो गुरुवर कहलाते हैं।।
सप्त द्वीप नव खण्ड में,
जो सदा ही पूजे जाते हैं,
वो गुरुवर कहलाते हैं।
आदर से जिनके आगे,
सभी के सिर झुक जाते हैं,
वो गुरुवर कहलाते हैं।।
🙏रचना-:
गोविन्द बल्लभ भट्ट (मुसाफिर )
रा० आ० प्रा० वि० अजेड़ा
डीडीहाट, पिथौरागढ़,
*🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड*

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