प्रकृति पर्व- हरेला- श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में उत्तराखण्ड के लोक पर्व "हरेला" के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट जी द्वारा रचित कविता-:
🙏🏾✍️🌳प्रकृति पर्व- हरेला
पावन पर्व पुनीत है,
प्राकृतिक विरासत का,
हरेला पर्व प्रतीक है।।
पर्यावरण संरक्षण का,
देता यह सन्देश है,
ये सुख समृद्धि का प्रतीक है।।
पावन मास सावन में,
कर्क संक्रान्ति को मनाया जाता है,
ये प्रकृति प्रेम का प्रतीक है।।
आया हरेला लाया हरियाली,
देव भूमि ने खुद को सजाया,
ये प्रकृति संरक्षण का प्रतीक है।।
हरित परिधान पहन,
सजे आज खेत खलिहान हैं,
आया हरेला पर्व महान है।।
रिमझिम बारिश की बूदों से,
चमक रहा सारा जहां है,
ये प्रकृति का सम्मान है।।
सिर पर रख कर हरेला,
देते बुजुर्गों को मान हैं,
ये धरती का सम्मान है।।
पेड़ लगाओ, प्रकृति बचाओ,
इस पावन पर्व का सन्देश है,
इसको बारम्बार प्रणाम है।।
🙏रचना-:
गोविन्द बल्लभ भट्ट (प्र०अ०)
रा० आ० प्रा० विद्यालय अजेड़ा
वि० ख०- डीडीहाट, पिथौरागढ़
*🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड*


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